शिक्षा और रोजगार को जोड़ने वाला एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट मॉडल सरकार की उस सोच को सामने लाता है, जो कक्षा और कार्यस्थल के बीच की खाई को पाटने का दावा करती है। पहली नौकरी पाने वाले युवाओं के लिए 15,000 रुपये का डीबीटी बोनस और एक करोड़ इंटर्नशिप की घोषणा निश्चित रूप से आकर्षक लगती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 को एक ओर जहां सरकार के घटक दलों द्वारा विकसित भारत का बजट और बदलते भारत की राजनीतिक-आर्थिक प्राथमिकताओं तथा सरकार की दीर्घकालिक सोच का आईना बताया गया है, वहीं विपक्ष द्वारा इसे पूरी तरह दिशाहीन बजट करार दिया गया है। बजट का मूल्यांकन केवल भविष्य के सपनों से नहीं, वर्तमान की चुनौतियों से भी होता है। शिक्षा और रोजगार को जोड़ने वाला एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट मॉडल सरकार की उस सोच को सामने लाता है, जो कक्षा और कार्यस्थल के बीच की खाई को पाटने का दावा करती है। यह कदम युवाओं को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में सकारात्मक है। आयकर दरों में तो कोई बदलाव नहीं हुआ है लेकिन आयकर प्रणाली को सरल बनाने की दिशा में घोषणा अवश्य हुई है। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है, कर व्यवस्था को जटिल छूटों के जाल से निकालकर सरल और पारदर्शी बनाना, ताकि उपभोग बढ़े और अर्थव्यवस्था में मांग का संचार हो। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 संतुलित प्रयास माना जा सकता है।





Comments (1)
Write Reply
Leave a Comment