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अवैध खनन रोकने में जनसहभागिता भी जरूरी

अरावली पर्वतमाला देखा जाए तो थार के मरुस्थल के फैलाव को रोकने की प्राकृतिक तारबंदी या दीवार माना जा सकता है। एक तरह से मरुस्थलीय विस्तार पर प्राकृतिक अवरोध है। जल और वायु को संरक्षित करता है तो जैव विविधता को संरक्षित करती है। अरावली पर्वतमाला में जैव विविधता के साथ ही वन्यजीव गलियारे विकसित हैं। सर्वोच्च न्यायालय की अरावली खनन को लेकर चिंता गंभीर हो जाती है क्योंकि अरावली पर्वतमाला को खोखला करने में अवैध खनन गतिविधियों की प्रमुख भूमिका रही है। यही कारण है कि 21 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की बेंच ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और समस्या के मूल कारण अवैध खनन रोक पर जोर दिया है। राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की तुलना में हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में अधिक नुकसान पहुंचाया गया है। अरावली पर्वतमाला को संरक्षित रखना समय की मांग और भविष्य के लिए आज की आवश्यकता है।

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