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हिमालय क्षेत्र की बर्बादी से नेताओं को नहीं कोई सरोकार

इसी तरह, कुल्लू, मंडी, शिमला और चंबा जैसे प्रमुख सेब उत्पादक इलाकों में भी बर्फबारी लगभग न के बराबर हुई है। इस वजह से जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ी हैं। इस पूरे परिदृश्य को अब पर्यावरण प्रदूषण से जोड़कर देखा जा रहा है। देहरादून, ऋषिकेश और हल्द्वानी जैसे शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स बार-बार बेहद खराब श्रेणी में पहुंच रहा है। देश के राजनीतिक दल इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हिमालय क्षेत्र में शोध पर आधारित दो महत्वपूर्ण पर्यावरणीय जानकारी के बारे में किसी ने चिंता तक जाहिर नहीं की। उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में राज्य में तेज गति से सड़क निर्माण और बड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स हुए हैं। इसका परिणाम यह निकला कि चारधाम यात्रा रूट के आसपास लगभग 100 नए भूस्खलन क्षेत्र पैदा हो गए। साल 2025 के मानसून सीजन में अब तक उत्तराखंड में रिकॉर्ड बारिश हुई है। उत्तराखंड में 2016 से 25 तक प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिसमें हजारों लोगों की जान गई है। पिछले 11 वर्षों में 27,197 प्राकृतिक घटनाएं हुई हैं, जिनमें अतिवृष्टि और भूस्खलन की घटनाएं प्रमुख हैं। साल 2025 में सबसे अधिक घटनाएं दर्ज हुईं, जिसमें 720 लोगों की मौत और 1207 लोग घायल हुए थे।

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