ऐसे में स्वाभाविक सवाल है कि अमेरिका-भारत-यूरोपीय संघ यानी जी-7 प्रभुत्व वाले प्रेम त्रिकोण और भारत-रूस-चीन यानी ब्रिक्स देश वाले प्रेम त्रिकोण के बीच भारत कब, कैसे और कितना गुटनिरपेक्ष संतुलन बना पाएगा, अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार रख पाएगा? क्योंकि सब कुछ इन्हीं द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातों-मुलाकातों पर निर्भर करेगा। डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच के संबंध जो साल 2025 की गर्मियों में व्यापारिक तनाव, रूस के भरोसेमंद संबंधों और टैरिफ पर टैरिफ युद्ध के कारण ठंडे पड़ गए थे, अमेरिका की फर्स्ट नीति ने व्यक्तिगत रसायन को भी प्रभावित किया। और अब जब मोदी-ट्रंप के आपसी रिश्ते पर जमी बर्फ के पिघलने की प्रक्रिया की बात हुई तो बताया गया कि ट्रंप ने सितंबर 2025 में ही मोदी की तारीफ की और रिश्तों की खास बताया। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया, जबकि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिकी उत्पादों पर जीरो टैरिफ का वादा किया। इस समझौते की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं – ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर घोषणा की कि मोदी के अनुरोध पर तत्काल प्रभाव से रेसिप्रोकल टैरिफ कम किया गया। रूस से तेल आयात रोकना, अमेरिका/वेनेजुएला से अधिक खरीद, और नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाना प्रमुख रियायतें रहीं। कुल टैरिफ 50% से घटकर 18% हो गया।





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